Reservations Needs a Review!
source: Internet सीजेपी और छात्रों के जंतर मंतर पर वृहद् विरोध प्रदर्शन के बाद, अचानक आरक्षण विरोध ने एक सुर पकड़ लिया। कैसे? यह राजनीति की एक सोची समझी चाल लगती है ताकि युवा जो कि अपने भविष्य के लिए वोट-बैंक की राजनीति से बाहर निकलकर अपने लिए सोच रहा था, उनके अपने-अपने खेमों में बाँटकर अलग-थलग किया जा सके। सोशल मीडिया(फ़ेसबुक) पर अचानक मेरी फीड में इस तरह के लेखों, कमेंट्स की जैसे बाढ़ सी आ गयी। इसलिए इस विषय पर लिखने से ख़ुद को मैं रोक नहीं पाया। जब बात आरक्षण पर बहस की आती है तो सीधा निशाना- अनुसूचित जाति/ जनजाति के लोगों पर होता है। क्योंकि प्रत्यक्ष तौर पर सीधे आरोप नहीं लगाये जा सकते है इसलिए यह बात कथित सवर्ण परोक्ष रूप में करते है। आरक्षण के विषय में आरोप दो तरह से लगते हैं- इन लोगों में क़ाबिलियत नहीं होती है और ये कम अंकों में भी डॉक्टर/ इंजीनियर वगेरह बन जाते हैं। क्योंकि ये कम अंकों में भी नौकरी पा जाते हैं तो इसलिए सिस्टम में प्रोडक्टिविटी घट जाती है। अब इसे विश्लेषण से समझिए: पहला, क़ाबिलियत को केवल अंकों से नहीं आँका जा सकता है। यही भावना भारत समेत वि...